Tuesday, 17 January 2017

स्टेट लेवल पर कब्बडी में अपना लोहा मनवा रही है 15 लड़किया
बहुत छोटी उम्र में ही ये मुकाम हासिल कर लिया है।
कैथल, 17 जनवरी (RAJKUMAR AGGARWAL)
 अगर कुछ करने पर आए तो लड़कियां क्या नहीं कर सकती इस बात को सही साबित कर पाई गांव की लड़कियों ने पूरे प्रदेश में अपने गांव का नाम चमका दिया है। पाई गांव हरियाणा में क्षेत्रफल व जनसंख्या की दृष्टि से तो पहले नम्बर पर है ही, साथ में बेटियों को भी नम्बर एक पर लाने में सबसे आगे है। यहां की बेटियां देश-प्रदेश में कब्बडी में अपना परचम लहरा चुकी है। एक साल पहले जो लड़कियां कब्बडी के बारे में कुछ भी जानती तक नही थी आज उनमें से 3 लड़कियां नेशनल लेवल व लगभग 15 लड़कियां स्टेट लेवल पर कब्बडी में अपना लोहा मनवा रही है। इन सभी लड़कियों ने बहुत छोटी उम्र में ही ये मुकाम हासिल कर लिया है। महज एक साल में इन सभी लड़कियों को सफल बनाने का काम किया है कोच राजबीर व उसके सहयोगियों ने। पाई गांव के कोच राजबीर सिंह खेल और खिलाडिय़ों के लिए सारा जीवन न्यौछावर कर दिया है। जिन्होंने गांव के सैकड़ों खिलाडिय़ों को बुलंदियों के शिखर पर पहुंचाने का कार्य किया। कोच राजबीर एक सरकारी स्कूल में शारीरिक शिक्षा के प्राध्यापक हैं। अपने समय में भी ये बहुत अच्छे खिलाड़ी रहे है जिन्होंने कई नेशनल स्तर की प्रतियोगिताएं खेली है। कोच के तौर पर भी कई नेशनल स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी भागीदारी साबित की है। ये लंबे समय तक जिला में अस्सीस्टेन्ट एजुकेशन ऑफिसर इन स्पोट्र्स भी रहे है। गांव के खिलाडिय़ों के लिए इन्होंने हमेशा से ही मेहनत की है। वैसे तो गांव पाई हमेशा से ही खेलों के मामले में अव्वल रहा है। यहां के खिलाड़ी कब्बडी में बहुत ऊंचे लेवल तक खेल चुके है। भारत-पाकिस्तान का कब्बडी मैच हो या फिर कोई और अन्य बड़ी प्रतियोगिता, यहां के खिलाडिय़ों का हर जगह बोलबाला रहा है। कब्बडी के नए फॉर्मेट कब्बडी प्रो लीग में भी इस गांव के हर सीजन में लगभग 7-8 खिलाड़ी खेलते है। इन सबकी मेहनत के पीछे कोच राजबीर का बहुत बड़ा हाथ है। कोच राजबीर सिंह व उसकी सहयोगी टीम ने बिना किसी स्वार्थ के गांव और खेल की भलाई के लिए काम किया है। लड़कियों को ट्रेन करने से पहले कोच राजबीर सिंह को ये बात खटकती थी की यहां के लड़कों ने तो कब्बडी व अन्य खेलों में खूब नाम कमाया है लेकिन लड़कियों के खेल के मामले में गांव पीछे ही था। फिर उन्हें अपने आप को साबित करने का मौका मिला और लड़कियों के स्कूल में डेपुटेशन पोस्ट पर रखा गया। लड़कियों के लिए खेलने का ग्राउंड तक नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। फिर क्या था उन्होंने अभिभावकों से बात करके लड़कियों को खेलने के लिए प्रेरित किया और महज एक साल में ही उनकी मेहनत रंग लाई। जिन लड़कियों को कब्बडी के बारे में कोई ज्ञान ही नहीं था वो लड़कियां आज स्टेट और नेशनल प्रतियोगिताएं खेल रही है। अभिभावक महज पांच साल की उम्र से ही लड़कियों को कब्बडी खेलने के लिए भेजते है। लगभग 120 के आसपास छोटी-बड़ी लड़कियां है जो कोच राजबीर और उनकी टीम की मदद से निशुल्क ट्रैनिंग ले रही है। उनके इस अभियान में कोच शमशेर सिंह, दिलबाग सिंह, नरेश कुमार व कई युवा कोच भी योगदान दे रहे है। इन सभी हीरों को तरासने का काम सिर्फ एक ही जौहरी ने किया। अगर देखा जाए तो कोच राजबीर सिंह मानते है कि स्कूल प्रशासन, अभिभावक व ग्राम पंचायत ने इस मुकाम को हासिल करने में उनका साथ दिया है। उनका मानना है कि ये मेहनत उनकी अकेले की नहीं है क्योंकि स्कूल प्रशासन और अभिभावकों ने उन पर विश्वास दिखाया और ग्राम पंचायत ने ग्राउंड से लेकर जिम तक की व्यवस्था करवाने में उनका सहयोग किया। आज ग्राम पंचायत के द्वारा लड़कियों के लिए बनाए गए जिम में सभी सुविधाएं उपलब्ध करवा दी गई हैं ताकि गांव के बेटों की तरह गांव की बेटियां भी आगे बढ़ सके। कोच राजबीर सिंह के अनुसार अगर मौका मिले तो लड़कियां क्या नहीं कर सकती और उनके इसी सपने को लड़कियों ने बहुत कम समय में पूरा करके भी दिखाया है।
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